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कैसे स्टॉक मार्केट में निवेश करें

कैसे स्टॉक मार्केट में निवेश करें
आयकर विभाग को आईटीआर लेट भरने पर ब्‍याज का भुगतान करना होता है। (Indian Express Archive)

स्टॉक मार्केट में निवेश करने के फायदे एवं नुकसान |

हालांकि यह सत्य है की लोग अपनी कमाई करने के वशीभूत होकर ही स्टॉक मार्केट में निवेश करते भी हैं और करने की इच्छा भी रखते हैं | लेकिन सच्चाई यह है की यह जरुरी नहीं है की हर व्यक्ति इसमें निवेश करके अपनी कमाई ही करेगा बल्कि बहुत सारे लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी मेहनत से कमाई गाढ़ी कमाई को स्टॉक मार्केट में निवेश करके गँवा देते हैं | इसलिए इसमें निवेश करने की प्रक्रिया को जुआ खेलने की प्रक्रिया से जोड़ा जाय कैसे स्टॉक मार्केट में निवेश करें तो कुछ गलत नहीं होगा खास तौर पर तब जब निवेशक दैनिक आधार पर अस्थिर ट्रेडिंग करता हो |

कहने का अभिप्राय यह है की स्टॉक मार्केट में निवेश करने के लिए लोग ऑनलाइन या ऑफलाइन एक ऐसी जगह जाते हैं जहाँ शेयर ख़रीदे या बेचे जाते हैं | हालांकि निवेशक की हर बार यह कोशिश रहती है की वह शेयर कम दाम में ख़रीदे एवं अधिक दाम में बेच दे जिससे वह अपनी अधिक से अधिक कमाई कर सके, लेकिन कभी कभी निवेशक को कैसे स्टॉक मार्केट में निवेश करें हानि भी उठानी पड़ती है |

इन्हीं बातों को आधार मानकर कहा जा सकता है की जहाँ स्टॉक मार्केट में निवेश के फायदे होते हैं वहीँ इसके नुकसान भी होते हैं | इसलिए आज हम हमारे इस लेख के जरिए स्टॉक मार्केट में निवेश करने के फायदे एवं नुकसान के बारे में वार्तालाप करेंगे |

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स्टॉक मार्केट में कैसे स्टॉक मार्केट में निवेश करें निवेश करने के फायदे (Advantages of investing in Stock Market In Hindi):

स्टॉक मार्केट में निवेश करने के अनेकों फायदे हैं जिनमें से कुछ मुख्य फायदों का उल्लेख नीचे किया गया है |

1. कम अवधि में अच्छी कमाई होने की संभावना:

स्टॉक मार्केट में निश्चित कुछ नहीं है, अर्थात यह अनिश्चिताओं का खेल है इसलिए इसमें कोई दो राय नहीं है की आज जो शेयर किसी निवेशक ने ख़रीदा हो | कल उसकी कीमत कितनी बढ़ जाय, इसलिए स्टॉक मार्केट में निवेश करने का सबसे बड़ा फायदा यह है की यहाँ आपको अच्छे रिटर्न प्राप्त करने के लिए वर्षों इंतजार ही करना पड़ेगा यह जरुरी नहीं है |

बल्कि बेहद कम अवधि यहाँ तक पांच दिन, दस दिन, महीने में भी आपको अच्छे रिटर्न प्राप्त हो सकते हैं | कहने का मतलब यह है की स्टॉक मार्केट में निवेश करके आप अपने आपकों रिस्क में तो डालते ही हैं लेकिन इस रिस्क के बदले बहुत अच्छा रिटर्न प्राप्त होने की भी संभावना होती है |

2. कंपनी में स्वामित्व:

कोई भी निवेशक जिस कंपनी के शेयर खरीदता है अर्थात जिस कंपनी में निवेश करता है वह अल्प रूप से ही सही लेकिन उसका स्वामी बन जाता है | हालांकि जो बात हम यहाँ पर कह रहे हैं वह सुनने में असाधारण सी लगती है की कैसे कोई आम व्यक्ति को किसी प्रसिद्ध कंपनी का स्वामित्व प्राप्त हो जाता है |

लेकिन यह सच्चाई है क्योंकि कोई भी व्यक्ति जब किसी प्रतिष्ठित कंपनी के शेयरों को खरीदने में पैसा लगाता है तो वह कंपनी का हिस्सा बन जाता है | भले ही उस व्यक्ति का सम्बंधित कंपनी में बेहद छोटा हिस्सा हो | इसलिए रिस्क कम करने के लिए निवेशक चाहे तो अलग अलग स्टॉक में पैसे लगा सकता है और जब चाहे अपनी मर्जी से अपने स्टॉक बेचकर कमाई कर सकता है |

3. स्टॉक मार्केट में निवेश से निवेशक को मतदान का अधिकार प्राप्त होता है |

जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की स्टॉक मार्केट में निवेश करने से निवेशक उस सम्बंधित कम्पनी में हिस्सेदार बन जाता है | और यह हिस्सेदारी निवेशक को कम्पनी की बोर्ड मीटिंग इत्यादि में लिए जाने वाले निर्णयों के अनुरूप या खिलाफ मतदान करने का अधिकार प्राप्त करती है | ऐसे में यदि कंपनी द्वारा कोई ऐसा निर्णय लिया जा रहा हो जो निवेशकों के खिलाफ हो तो निवेशक इस निर्णय के खिलाफ अपना मतदान कर सकते हैं |

4. उचित निर्णयों से उचित कमाई:

स्टॉक मार्केट में निवेश करके निवेशक अपने उचित निर्णयों के माध्यम से अकूत सम्पति प्राप्त कर सकता है इसके एक नहीं कई उदाहरण हमारे सामने बीते कुछ वर्षों में प्रस्तुत हुए हैं |

कहने का मतलब यह है की स्टॉक मार्केट में निवेश करके एवं उचित समय पर उचित निर्णय लेके निवेशक न सिर्फ कमाई कर सकता है बल्कि अपने सपनों को भी इस मंच के माध्यम से उड़ान दे सकता है | और इसी के माध्यम से वह एक दिन बहुत बड़ा अमीर आदमी भी बन सकता है | जानिए कैसे स्टॉक मार्केट के जरिए राकेश झुनझुनवाला ने कमाई अकूत सम्पति |

स्टॉक मार्केट में निवेश करने के नुकसान (Disadvantages of Investing in Stock Market) :

जैसा की हम सबको विदित है की दुनिया में कोई भी वस्तु या सेवा जिसके अनेकों फायदे होंगे उसके कुछ न कुछ नुकसान भी अवश्य होंगे | कहने का अभिप्राय यह है की दुनिया में शायद ही ऐसा कुछ हो जिसके सिर्फ फायदे फायदे हों | ठीक इसी तरह स्टॉक मार्केट में निवेश करने के भी अनेकों नुकसान हैं जिनका संक्षिप्त वर्णन कुछ इस प्रकार से है |

1. स्थिरता का अभाव:

यद्यपि हम पहले भी बता चुके हैं की स्टॉक मार्केट में किया गया निवेश अस्थिर होता है अर्थात आप अनुमान नहीं लगा सकते हैं की शेयरों की कीमत बढ़ेगी या घटेगी या फिर कितनी घटेगी बढ़ेगी | एक दिन में एक ही कंपनी के शेयरों की कीमतों में बहुत बार उतार चढ़ाव देखने को मिलता है | इस तरह के उतार चढ़ाव कई बार अप्रत्याशित होते हैं जिसके कारण निवेशक को भारी हानि उठानी पड़ सकती है |

2. लाभांस में कमी:

निवेशक स्टॉक मार्केट में इसलिए निवेश करता है ताकि वह अपनी कमाई कर सके इसलिए वह किसी प्रतिष्ठित एवं अच्छा कारोबार करने वाली कंपनी का चुनाव अपनी सूझ बूझ से करता है | लेकिन जब कंपनी अच्छा लाभ प्राप्त करती है तो एक निवेशक उस कंपनी से लाभ प्राप्त करने वाला अंतिम व्यक्ति होता है | क्योंकि लाभ का अधिकतर हिस्सा कर्मचारियों, आपूर्तिकर्ताओं, लेनदारों और इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है । उसके बाद ही जो बचता है उसे निवेशकों में वितरित किया जाता है |

3. अधिकारों में कमी:

यद्यपि यह सत्य है की किसी कंपनी के शेयर खरीदकर निवेशक उस कंपनी का आंशिक तौर पर मालिक बन जाता है | लेकिन वह कंपनी के सभी प्रकार के अधिकारों एवं स्वामित्व का हकदार नहीं होता है | कंपनी का कैसे स्टॉक मार्केट में निवेश करें कोई भी शेयर धारक किसी कंपनी के कार्यालय में प्रविष्ट होकर उस कंपनी का वित्तीय विवरण एवं प्रगति रिपोर्ट नहीं मांग सकता है | ताकि वह यह पता कैसे स्टॉक मार्केट में निवेश करें लगा सके की कंपनी किस दिशा की ओर अग्रसित हो रही है |

4. शेयरों की खरीदारी में ब्रोकरेज शुल्क:

स्टॉक मार्केट में निवेश के लिए जब भी निवेशक द्वारा शेयर ख़रीदे जाते हैं और उनके दाम बढ़ने पर कमाई के लिए जब भी वे बेचे जाते हैं दोनों स्थितियों में निवेशक को ब्रोकरेज कंपनी को कैसे स्टॉक मार्केट में निवेश करें ब्रोकरेज शुल्क देना होता है | या यूँ कहें की खरीद फरोख्त कराने वाली कंपनी स्वयं ही अपना ब्रोकरेज शुल्क काट लेती है तो गलत नहीं होगा इससे निवेशक को मिलने वाले लाभ में कमी आती है |

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इनका नाम महेंद्र रावत है। इनकी रूचि बिजनेस, फाइनेंस, करियर जैसे विषयों पर लेख लिखना रही है। इन विषयों पर अब तक ये विभिन्न वेबसाइटो एवं पत्रिकाओं के लिए, पिछले 7 वर्षों में 1000 से ज्यादा लेख लिख चुके हैं। इनके द्वारा लिखे हुए कंटेंट को सपोर्ट करने के लिए इनके सोशल मीडिया हैंडल से अवश्य जुड़ें।

मोटी कमाई के लिए घर पर बैठकर खरीदें Apple, Google और Tesla जैसी कंपनियों के शेयर, ये रहा पूरा प्रोसेस

how to invest in us market from india-टेस्ला, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों के शेयर रोजाना नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं. इन कंपनियों की तेजी का फायदा आप भी उठा सकते हो. आज हम आपको इससे जुड़ी जरूरी जानकारी दे रहे हैं.

मोटी कमाई के लिए घर पर बैठकर खरीदें Apple, Google और Tesla जैसी कंपनियों के शेयर, ये रहा पूरा प्रोसेस

TV9 Bharatvarsh | Edited By: अंकित त्यागी

Updated on: Jan 13, 2022 | 6:00 AM

भारतीयों में विदेशी शेयरों, खासकर अमेरिकी कंपनियों (US Companies) के शेयरों में निवेश का चलन तेजी पकड़ बना रहा है. अगर आप भी घर बैठे एपल, गूगल, टेस्‍ला जैसे शेयरों को खरीदने के विभिन्न विकल्पों के बारे में जानना चाहते हैं तो यहां हम आपको इसकी पूरी जानकारी देने जा रहे हैं. अमेरिकी कंपनी ऐप्पल (Apple) की कुल मार्केट वेल्यू 3 ट्रिलियन डॉलर के पार हो गई है. टेस्ला, माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), अमेजन (Amazon), फेसबुक (Facebook) और गूगल (Google) जैसी कंपनियां भी तेजी से अमीर होती जा रही हैं. इन कंपनियों की तेजी से होती ग्रोथ को देखकर भारत से भी कई निवेशक अमेरिकी कंपनियों में पैसा लगा रहे हैं. यह संभव हो सका है विदेश में निवेश करने वाले फंड के जरिए.एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड इंडिया यानी एंफी की मानें तो 2021 में जनवरी से नवंबर के दौरान विदेश में पैसा लगाने वाले फंड्स ऑफ फंड्स में 13 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश हुआ है.

Apple Google और Amazon जैसी अमीर कंपनियों के शेयर खरीदने का पूरा प्रोसेस-विदेश में निवेश करने का सबसे आसान तरीका फंड ऑफ फंड्स यानी FoF रूट ही है. विदेशी फंड ऑफ फंड ऐसे ग्लोबल म्यूचुअल फंड्स में निवेश करते हैं जो वैश्विक शेयरों में पैसा लगाते हों. ऐसे फंड ऑफ फंड्स की होल्डिंग में एक या एक से वैश्विक ग्लोबल फंड शामिल हो सकते हैं. हालांकि विदेशी बाजारों में निवेश के लिए सिर्फ विदेशी फंड ऑफ फंड्स ही एक तरीका नहीं है… कई और भी तरीके हैं, आइए उन्हें जानते हैं…

(1) अंतरराष्ट्रीय स्टॉक वाले म्यूचुअल फंड्स में निवेश

विदेशों में निवेश का दूसरा तरीका सेक्टोरल या थीमैटिक फंड हैं. सेक्टोरल या थीमैटिक म्यूचुअल फंड्स की होल्डिंग में भारतीय और विदेशी शेयरों का मिश्रण हो सकता है. यानी इस तरह के फंड्स में ऐपल, गूगल सहित भारतीय कंपनियां शामिल हो सकती हैं.

(2) इंडेक्स फंड

एक और तरीका है जिसे इंडेक्स फंड कहा जाता है…. जिस तरह भारतीय शेयर बाजारों के अलग-अलग इंडेक्स के लिए इंडेक्स फंड उपलब्ध हैं उसी तरह वैश्विक शेयर बाजारों के लिए भी इंडेक्स फंड हैं… वैश्विक बाजारों में निवेश करने वाले इंडेक्स फंड भी दुनिया के किसी एक शेयर बाजार के किसी एक इंडेक्स को ट्रैक करके निवेश करते हैं… मोतीलाल ओसवाल एसएंडपी 500 इंडेक्स फंड इसका एक उदाहरण है.

(3) अंतरराष्ट्रीय ईटीएफ में निवेश

वैश्विक बाजारों में निवेश का एक और तरीका इंटरनेशनल एक्सचेंज ट्रेडेड फंड या ईटीएफ भी हैं, ये ईटीएफ सामान्य तौर पर 2 तरह हो सकते हैं- Country specific और Country neutral. Country specific ईटीएफ आपको किसी चुनिंदा देश में निवेश करने की अनुमति देते हैं. उदाहरण के लिए, वैनएक्क वेक्टर्स वियतनाम ईटीएफ आपको वियतनाम इक्विटी बाजार में कैसे स्टॉक मार्केट में निवेश करें निवेश करने की अनुमति देता है. दूसरी ओर, Country neutral ईटीएफ आपको पूरी दुनिया में निवेश करने की अनुमति देते हैं.

(4) सीधा निवेश

ऐसा नहीं है कि सिर्फ फंड्स या ईटीएफ के जरिए ही आप अमेरिकी या अन्य विदेशी बाजारों में निवेश कर सकते हैं, बल्कि सीधे निवेश का तरीका भी है, जैसे भारतीय शेयर बाजार में निवेश के लिए आप ब्रोकर के जरिए ट्रेडिंग कर सकते हैं, ठीक उसी तरह अमेरिकी बाजारों में भी कर सकते हैं, बशर्ते अमेरिकी ब्रोकर हायर करना होगा या फिर भारत में जो ब्रोकर अमेरिकी बाजारों में निवेश की सुविधा दे रहे हैं उनसे संपर्क करना होगा… दोनों ही परिस्थितियों में आपको इंटरनेशनल ट्रेडिंग खाता भी खोलना पड़ेगा और ट्रेडिंग के लिए करेंसी को डॉलर में बदलवाना होगा.. ऐसा करके आप सीधे ऐपल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी अमेरिकी कंपनियों के शेयर खरीद सकते हैं.

(5) इंडियन डिपॉजिटरी रिसीट्स (IDRs)

आप इंडियन डिपॉजिटरी रिसीट्स यानी आईडीआर के जरिए भी विदेशी बाजारों में निवेश कर सकते हैं. आईडीआर मूल रूप से भारतीय करेंसी में होता है और सेबी रजिस्टर्ड डिपॉजिटरी इसे तैयार करता है. आईडीआर को कंपनी की इक्विटी के बदले जारी किया जाता है ताकि विदेशी कंपनियों को भारत से धन जुटाने में सक्षम बनाया जा सके. चूंकि विदेशी कंपनियों को भारतीय शेयर बाजार में लिस्टिंग कराने की अनुमति नहीं है, आईडीआर उन कंपनियों के शेयरों को खरीदने का एक तरीका है.

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अगर आप भी करते हैं स्‍टॉक मार्केट में निवेश, तो आप पर कितना लगता है टैक्‍स

होममेकर्स, कैसे स्टॉक मार्केट में निवेश करें रिटायर्ड लोग अपनी जमा पूंजी को शेयरों में निवेश करते हैं, लेकिन उन्‍हें इस बात की जानकारी नहीं होती है कि शेयरों से होने वाली कमाई इनकम टैक्‍स के दायरे में आती है या नहीं। वास्‍तव में शेयरों को बेचने और खरीदने पर होने वाले फायदे और हानि आधार पर टैक्‍स लगाया जाता है।

अगर आप भी करते हैं स्‍टॉक मार्केट में निवेश, तो आप पर कितना लगता है टैक्‍स

आयकर विभाग को आईटीआर लेट भरने पर ब्‍याज का भुगतान करना होता है। (Indian Express Archive)

इस बात की जानकारी सभी को होती है कि सैलरी, रेंटल इनकम और बिजनेस होने वाली आय टैक्‍सेबल होती है, जिसके लिए आय के हिसाब से स्‍लैब भी दिए गए हैं। जिस आय की स्‍लैब में जो आता है, उसे उतना टैक्‍स देना होता है। वहीं दूसरी ओर बात शेयरों से होने वाली कमाई की बात करें तो सवाल उठता है कि वो भी क्‍या टैक्‍सेबल है। होममेकर्स, रिटायर्ड लोग अपनी जमा पूंजी को शेयरों में निवेश करते हैं, लेकिन उन्‍हें इस बात की जानकारी नहीं होती है कि शेयरों से होने वाली कमाई इनकम टैक्‍स के दायरे में कैसे स्टॉक मार्केट में निवेश करें आती है या नहीं। वास्‍तव में शेयरों को बेचने और खरीदने पर होने वाले फायदे और हानि आधार पर टैक्‍स लगाया जाता है। आइए आपको भी बताते हैं कैसे स्टॉक मार्केट में निवेश करें कि शेयरों से होने वाली कमाई पर कितना और किस तरह का टैक्‍स लगता है।

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन/लॉस
यदि स्टॉक एक्सचेंज में लिस्‍टेड शेयरों को खरीदने के 12 महीनों के अंदर बेचे जाते हैं, तो विक्रेता को शॉर्ट टर्म केपिटल गेन या फ‍िर शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस हो सकता है। जब शेयर खरीद मूल्य से ज्‍यादा कीमत पर बेचे जाते हैं तो विक्रेता शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन होता है।

लांग टर्म कैपिटल गेन और लॉस
लांग टर्म केपिटल गेन और लॉस तब होता है जब शेयरों को खरीदने के 12 महीने के बाद उन्‍हें बेचा जाता है। बजट 2018 से पहले इक्विटी शेयरों या म्यूचुअल फंड की इक्विटी-बेस्‍ड यूनिट्स को बेचने होने वाला लांग टर्म कैपिटल गेन को धारा 10 (38) के तहत टैक्‍स में छूट दी हुई थी। 2018 बजट के प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई विक्रेता एक लाख से रुपए से ज्‍यादा लांग टर्म कैपिटल गेन अर्जित करता है तो उस 10 फीसदी लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स लगता है। इसके अलावा ऐसे लोगों को इंडेक्सेशन का बेनिफ‍िट भी नहीं दिया जाएगा।

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शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स पर टैक्स
शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स पर 15 फीसदी टैक्स लगता है। टैक्स स्लैब के बावजूद, शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर 15 फीसदी का स्‍पेशल टैक्‍स रेट लागू होता है। इसके अलावा, यदि आपकी कुल टैक्‍सेबल इनकम शॉर्ट टर्म गेन को छोड़कर टैक्‍सेबल इनकम से कम है यानी 2.5 लाख से कम है तो आप इस कमी को अपने शॉर्ट टर्म गेन के अगेंस्‍ट समायोजित कर सकते हैं। बाकी शॉर्ट टर्म गेन पर 15 फीसदी टैक्‍स + 4 फीसदी सेस लगाया जाएगा।

लांग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्‍स
अगर शेयर बेचने पर आपका लांग टर्म कैपिटल गेन 1 लाख रुपए से कम है तो उस पर कोई टैक्‍स नहीं लगाया जाएगा। अगर यह लांग टर्म कैपिटल गेन एक लाख रुपए से ज्‍यादा है तो उस पर 10 फीसदी का टैक्‍स लगाया जाएगा। साथ ही उन्‍हें इंडेक्‍सेशन का लाभ भी नहीं मिलेगा। यह प्रावधान बजट 2018 के बाद किया गया है।

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