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लघु स्थिति

लघु स्थिति
संघ ने कोयले आपूर्ति की मांग

बिलासपुर जिला पंचायत सभापति ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल,टी एस सिंहदेव व ताम्रध्वज साहू का जताया आभार

शॉर्ट स्टेचर या छोटा कद- कारण और लक्षण

Dr.Richa Arora Agarwal | Lybrate.com

शॉर्ट स्टेचर शब्द उस व्यक्ति की ऊंचाई का वर्णन करता है जो किसी व्यक्ति की आयु, लिंग, नस्लीय समूह या परिवार के लिए औसत ऊंचाई से काफी नीचे है. विकास विफलता अक्सर छोटे स्तर के साथ उलझन में है. अंततः समय के साथ होने लघु स्थिति वाली वृद्धि विफलता के परिणामस्वरूप छोटे स्तर पर परिणाम होता है. परिभाषा के अनुसार, विकास विफलता एक चिकित्सा स्थिति है. हालांकि, छोटे कद अक्सर एक सामान्य संस्करण होता है.

लघु स्थिति चिकित्सा स्थिति के कारण संकेत या लक्षण हो सकती है या नहीं भी हो सकती है. आपके बच्चे की वृद्धि का आकलन समय की अवधि में किया जाना चाहिए, न केवल एक बिंदु पर. पूर्व विकास पैटर्न से कोई भी प्रस्थान, बच्चे की आनुवांशिक पृष्ठभूमि के लिए उपयुक्त एक बीमारी की उपस्थिति को संकेत दे सकता है.

लघु उद्योगों का विकास | उत्तर प्रदेश में लघु औद्योगिक क्षेत्र एवं सम्पूर्ण औद्योगिक क्षेत्र का वार्षिक वृद्धि दर | उत्तर प्रदेश में लघु उद्योगों की स्थिति | उत्तर प्रदेश के औद्योगिक समस्याओं की व्याख्या | उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास के समस्याओं की विवेचना

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लघु उद्योगों का विकास

एक विकासशील अर्थव्यवस्था में लघु उद्योग उत्पादन, रोजगार, औद्योगीकरण, आदि में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते हैं। भारत के सन्दर्भ में भी यह बात लागू होती है भारत में देश के कुल निर्यात का एक तिहाई हिस्सा लघु उद्योगों के द्वारा किया जाता है। जोकि एक महत्वपूर्ण योगदान है। इससे यह बात स्पष्ट होती है कि औद्योगीकरण में लघु उद्योगों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। चाहे वह देश हो या राज्य प्रत्येक अर्थव्यवस्था में लघु उद्योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उत्तर प्रदेश में लघु उद्योगों की स्थिति को तालिका-1 तालिका-2 में प्रदर्शित किया गया है।

तालिका-1 में राज्य आय, लघु उद्योग, समस्त विनिर्माण क्षेत्र तथा समस्त औद्योगिक क्षेत्र की वार्षिक वृद्धि दर को दिखाया गया है। जैसा कि हम जानते हैं कि उत्तर प्रदेश में 1990 के दशक से राज्य आय की विकास दर अत्यन्त मन्द या सुस्त पड़ गयी थी तथा इसकी वृद्धि दर में व्यापक उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे हैं। राज्य आय की स्थिति को देखने से इस बात का अनुभव होता है कि राज्य की अर्थव्यवस्था में आत्मविश्वास एवं स्थायित्व की कमी बनी हुई है। राज्य की यह स्थिति राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के विपरीत है।

छत्तीसगढ़ के एक हजार लघु उद्योगों में हराया संकट

छत्तीसगढ़ के एक हजार लघु उद्योगों में हराया संकट

छत्तीसगढ़ लघु एवं सहायक उद्योग संघ ने एसईसीएल के सीएमडी को पत्र लिखकर राज्य शासन से किये गए अनुबंध के तहत प्रदेश के लघु उद्योगों को कोयले की आपूर्ति करने की मांग की है। संघ ने कहा है कि कोयला आधारित उद्योगोंबको कोल आवंटन न होने से कारखानों में तालाबंदी की नोबत आ गई है।

इससे संकट गहराने लगा है। संघ ने अपने पत्र में कहा है कि सीएसआइडीसी राज्य के लघु उद्योगों को कोयला प्रदाय करने हेतु स्टेट एजेंसीज है। राज्य शान से उद्योगों को कोल आवंटन के लिये राज्य औद्योगिक विकास निगम को अधिकृत किया है। इसके माध्यम से एसईसीएल का कोयला छत्तीसगढ़ के लघु उद्योगों को वितरित किया जाता है। कोयला मंत्रालय ने पाईवेट एजेंसीज के माध्यम से कोयला प्रदाय बंद कर दिया है।

Bilaspur News: छत्तीसगढ़ के एक हजार लघु उद्योगों में गहराया संकट

Bilaspur News: छत्तीसगढ़ के एक हजार लघु उद्योगों में गहराया संकट

बिलासपुर। एसईसीएल द्वारा कोयले की आपूर्ति न करने के कारण छत्तीसगढ़ के एक हजार से ज्यादा लघु उद्योगों पर संकट गहरा गया है। कोयले की आपूर्ति न होने से कारखानों में तालाबंदी की स्थिति बनने लगी है।छत्तीसगढ़ लघु एवम सहायक उद्योग संघ ने एसईसीएल के सीएमडी को पत्र लिखकर राज्य शासन से किए गए अनुबंध के तहत प्रदेश के लघु उद्योगों को कोयले की आपूर्ति करने की मांग की है। संघ ने कहा है कि कोयला आधारित उद्योगों को कोल आवंटन न होने से कारखानों में तालाबंदी की नोबत आ गई है। इससे संकट गहराने लगा है।

संघ ने अपने पत्र में कहा है कि सीएसआइडीसी राज्य के लघु उद्योगों को कोयला प्रदाय करने के लिए स्टेट एजेंसी है। राज्य शान से उद्योगों को कोल आवंटन के लिए राज्य औद्योगिक विकास निगम को अधिकृत किया है। जिसके माध्यम से एसईसीएल का कोयला छत्तीसगढ़ के लघु उद्योगों को वितरित किया जाता है। कोयला मंत्रालय ने पाइवेट एजेंसी के माध्यम से कोयला प्रदाय बंद कर दिया है। सीएसआइडीसी छत्तीसगढ़ शासन की एजेंसी है। छत्तीसगढ़ शासन ने कोल कंपनी द्वारा लिखे गए पत्र के जवाब में यह स्पष्ट कर दिया है। एसईसीएल के सेल्स एंड मार्केटिंग डिवीजन द्वारा छत्तीसगढ़ शासन के उद्योग विभाग से जानकारी चाही गई थी कि सीएसआइडीसी शासकीय एजेंसीज है कि नहीं।

लघु उद्योग दिवस विशेष: लगन और मेहनत से हासिल कर रहे मुकाम, युवाओं के साथ महिलाएं बन रही उद्यमी

लघु उद्योग दिवस विशेष: लगन और मेहनत से हासिल कर रहे मुकाम, युवाओं के साथ महिलाएं बन रही उद्यमी

शहडोल. सरकार की योजनाओं व समूहों के सहयोग से जिले के युवाओं के साथ ही महिलाएं भी उद्यमी बन रही हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में नवाचार कर जहां स्वयं का रोजगार स्थापित कर रहे हैं वहीं दूसरों को भी रोजगार के अवसर प्रदान कर रहे हैं। छोटी-छोटी औद्योगिक इकाइयां स्थापित कर महिलाएं स्वयं को सशक्त बना रही हंै। साथ ही अन्य महिलाओं के लिए भी आय का जरिया तैयार कर रही हंै। वहीं युवा सरकार की योजनाओं की मदद से लघु उद्योगों के साथ ही अन्य कारोबार स्थापित कर स्वावलंबी बन रहे हैं। साथ ही दूसरों को रोजगार मुहैया करा रहे हैं।
स्टार्टअप इंडिया से मदद, शुरू की कंपनी
नगर के सुनील कुमार दिल्ली में बी.टेक, एमटेक, नैनो टेक्नॉलाजी व पीचएडी की पढ़ाई की। पढ़ाई के दौरान ही वर्ष 2015 में अपनी कंपनी प्रारंभ कर दी थी। स्टार्टअप इंडिया के माध्यम से उन्हें फंडिंग हुई तो उन्होंने पूरा सेटअप तैयार कर लिया। आईआर्क नाम की उनकी यह कंपनी नैसकॉम व माइक्रोसाफ्ट से समर्थित है। जो दिल्ली एनसीआर, गुजरात, चेन्नई, मध्य प्रदेश व हैदराबाद में काम कर रही है। कंपनी डाइबिटीज, हार्टअटैक, किडनी फेल्योर, कैंसर जैसी बीमारियों के मरीजों के भविष्य की जोखिम की पहचानने में मदद करती है। इससे रोगी जोखित की पहचान कर सकता है। जिसमें मरीजों की बीमारियों के अगले स्टेप की पड़ताल कर डॉक्टरों की मदद से समुचित इलाज व कम दाम पर दवा उपलब्ध कराना व मरीजों की मॉनीटरिंग की दिशा में विशेष कार्य कर रहे हैं। सुनील कुमार की इस कंपनी में दिनाकरण, डॉ उत्कर्ष जैन व डॉ निधि चौहान पूरा सहयोग कर रहे हैं। जिससे मरीजों को समुचित लघु स्थिति लाभ मिले।
लोन लेकर शुरू किया मसाले का काम
बेम्हौरी निवासी ज्योति वर्मन 2019 के पहले एक गृहिणी थी जो कि बच्चों की शिक्षा के साथ ही घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए अपनी जरूरतों को भी नजर अंदाज कर देती थी। वर्ष 2019 में वह समूह से जुड़ी और अलग-अलग प्रशिक्षण प्राप्त किया और हल्दी के लघु उद्योग से जुड़कर स्वयं को आत्मनिर्भर बनाने में जुट गई। ज्योति ने उद्यमिता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत 25 हजार का लोन लिया। जिससे उसने साबूत हल्दी से मसाला बनाने की मशीन खरीद कर उसकी मदद से हल्दी पाउडर व अन्य मसाले तैयार कर पैकेट बनाकर आस-पास की दुकानों व संकुल स्तरीय संगठन, ग्राम संगठन और समूह की बैठकों में बेंचने लगी। ज्योति के इस काम में उसके पति ने भी सहयोग करना प्रारंभ कर दिया। जिससे होने वाली आय से उसने जहां अपना घर तैयार किया वहीं बच्चों को भी अच्छी शिक्षा दिलाने में सफल हुई है। ज्योति अपने इस कारोबार से हर माह 20-25 हजार रुपए की आय अर्जित कर रही हैं।
अब स्वयं कर सकेंगे हल्दी की प्रोसेसिंग
जनपद पंचायत गोहपारू अंतर्गत सरिहट निवासी टीकाराम कुशवाहा लगभग 3 एकड़ भूमि पर हल्दी की खेती करते थे। इसके बाद भी उन्हें इससे उतना फायदा नहीं मिल पाता था। हल्दी उबालना व उसकी प्रोसेसिंग करने में बहुत समय लगता था। जितनी ज्यादा हल्दी होती थी उतनी प्रोसेसिंग नहीं हो पाती थी। जिससे टीकाराम को काफी नुकसान होता था। उन्होने छोटे स्तर पर आधुनिक तरीके से हल्दी की लघु स्थिति प्रोसेसिंग का काम शुरु किया। जिससे उन्हें काफी मदद मिलने लगी। अब वह प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना से 15 लाख 38 हजार रुपए का लोन स्वीकृत कराया है। जिसकी मदद से अब वह पूरा सेटअप तैयार कर रहे हैं। आधुनिक तरीके से हल्दी की प्रोसेसिंग करेंगे तो समय पर उनकी पूरी हल्दी की प्रोसेसिंग हो जाएगी। साथ ही वह दूसरों की हल्दी की भी प्रोसेसिंग कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। हल्दी की प्रोसेसिंग कर उसका पाउडर तैयार कर वह आसानी से उसे बाजार में उपलब्ध करा सकेंगे।

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