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अंतरराष्ट्रीय व्यापार के फायदे

अंतरराष्ट्रीय व्यापार के फायदे

मुक्त व्यापार नीति क्या है मुक्त व्यापार के पक्ष तथा विपक्ष में तर्क?

मुक्त व्यापार वह नीति है जिसमें अंतरराष्ट्रीय व्यापार में पूरी स्वतंत्रता होती है। ऐसी स्थिति में दो देशों के बीच वस्तुओं के आयात-निर्यात में किसी प्रकार की बाधा नहीं होती। सोलहवीं शताब्दी के प्रारंभ से लेकर अठारहवीं शताब्दी के तक अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के बारे में जो प्रचलित सोच थी उसे आर्थिक विचारों के इतिहास में वणिकवाद के नाम से जाना जाता है। वणिकवाद बहुत ही संकीर्ण सोच थी। वणिकवाद के अनुसार निर्यात से देश की सम्पदा में वृद्धि होती है, जबकि आयात से देश की सम्पदा में कमी आती है। एडम स्मिथ ने इस मान्यता का खंडन किया और बताया की व्यापार से सभी देशों को लाभ होता है इसलिए उन्होंने मुक्त व्यापार की वकालत की। उनके अनुसार “मुक्त व्यापार की धारणा का उपयोग व्यापारिक नीति की उस प्रणाली को बंद करने के लिए किया जाता है जिसमें देश तथा विदेशी वस्तुओं में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता इसलिए न तो विदेशी वस्तुओं पर अनावश्यक कर लगाये जाते हैं और न ही स्वदेशी उद्योगों को कोई विशेष सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।” इस प्रकार, मुक्त व्यापार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार तथा आंतरिक व्यापार में कोई अंतर नहीं करता। आंतरिक व्यापार में स्वतंत्रता होने पर कोई भी व्यक्ति सबसे कम क़ीमत वाले बाज़ार में वस्तु खरीद सकता है और उत्पादक अपनी वस्तु को उस बाज़ार में बेंच सकता है जहाँ उसे सबसे ज्यादा क़ीमत प्राप्त हो सके। ठीक उसी प्रकार मुक्त अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कोई भी देश सबसे कम क़ीमत पर वस्तु खरीद सकता है और साथ ही सबसे अधिक क़ीमत देने वाले देश में अपनी वस्तु बेंच सकता है।

मुक्त व्यापार के पक्ष में तर्क

एडम स्मिथ के आने से ही मुक्त व्यापार के पक्ष में हवा चल गई। उन्होंने इसके फायदे के बारे में इतना ठोस तर्क रखा कि सभी प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री इसके पक्ष में बोलने लगे। कुछ व्यापार शून्य व्यापार से बेहतर है, जबकि मुक्त व्यापार प्रतिबंधित या संरक्षित व्यापार से बेहतर है। मुक्त व्यापार के पक्ष में तर्क प्रस्तुत किये जाते हैं-

1. उत्पादन के साधनों का उचित प्रयोग- मुक्त व्यापार में सभी देश केवल उसी वस्तु का उत्पादन करता है जिसमें उसे लागत सम्बन्धी लाभ प्राप्त हो। यह लाभ चाहे वह अपेक्षा न रखनेवाला हो या समानता और असमानता दिखानेवाला, उत्पादन के साधनों के उचित तथा सबसे कुशल प्रयोग को पूरा यक़ीन करेगा।

2. तकनीकी विकास को बढ़ावा- मुक्त व्यापार में देशों के बीच आपसी मुक़ाबला रहता है. इस मुक़ाबला के कारण सभी उत्पादक पूरी कोशिश करता है कि उसके उत्पाद की लागत कम हो जिससे कि वह कम कीमत पर अपने उत्पाद को बेंच सके। इसके लिए उत्पादक तकनीकी अनुसंधान व विकास को बढ़ावा देता है।

3. सामाजिक उत्पादन का अधिकतमीकरण- मुक्त व्यापार श्रम विभाजन और विशेषज्ञता को बढ़ाता है जिसके कारण कुल उत्पादन में वृद्धि होती है और साथ ही वस्तु का उत्पादन लागत भी गिरता है। समाज को पहले से कम कीमत' पर और साथ ही अधिक वस्तुओं का उपभोग करने का मौका मिलता है। वस्तुओं का मूल्य उनके सीमान्त लागत के बराबर हो जाता है। यह स्थिति अनुकूलतम उत्पादन की स्थिति को व्यक्त करता है। प्रत्येक देश की आर्थिक क्रियाओं का उद्देश्य अधिकतम सामाजिक लाभ की प्राप्ति होती है और यह मुक्त व्यापार में प्राप्त किया जा सकता है।

4. आयात सामग्री का वस्तुओं के मूल्यों में कमी- मुक्त व्यापार सस्ते आयात सामग्री वस्तुओं की उपलब्धता को सुनिश्चित करता है। उपभोक्ताओं को ऐसे देश की वस्तु का उपभोग करने का मौका मिलता है जहाँ वह कम-से कम लागत पर प्राप्त किया जाता है। यह अलग बात है कि इस तर्क में देशी उत्पादकों के हितों की अवहेलना की गई है और साथ ही रोजगार के पहलू को भी नजरंदाज किया गया है।

5. एकाधिकारिक शोषण से मुक्ति- मुक्त व्यापार में प्रतियोगिता होने के कारण उपभोक्ता एकाधिकारिक शोषण से बच जाते हैं। प्रत्येक देश के उत्पादक को केवल देश के ही नहीं बल्कि विदेशी उत्पादकों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है जिसके कारण एकाधिकार का जन्म नहीं होता और फलस्वरूप उपभोक्ताओं को सस्ते मूल्य पर वस्तुएं प्राप्त होती है।

6. विश्व के सभी देशों के आर्थिक हितों की सुरक्षा- मुक्त व्यापार व्यवस्था से विश्व के सभी देशों के हितों की रक्षा होती है। मुक्त व्यापार के इसलिये आयात करनेवाले देश और निर्यात करने वाले देश दोनों को लाभ प्राप्त होता है। मुक्त व्यापार में एक देश दूसरे देश पर निर्भर होता है इसलिये उन देशों के बीच सहयोग एवं सद्भावना जागृत होती है।

मुक्त व्यापार विपक्ष में तर्क

मुक्त व्यापार की अपनी सीमाएं हैं, जिसके कारण हमें अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं होता। अनुभव तो यही बताता है कि जैसे-जैसे दुनिया मुक्त व्यापार की और बढ़ रही है, विकसित और विकासशील देशों के बीच की खाई और चैड़ी होती जा रही है. बहुराष्ट्रीय कम्पनिओं का जाल विकासशील देशों में फैलता जा रहा है। उनके यहाँ के घरेलू उद्योग इन बहुराष्ट्रीय कम्पनिओं के आगे मुकाबला करने में कठिनाई का अनुभव कर रहे है। कई उद्योग तो बहुराष्ट्रीय कम्पनिओं के सामने अपना अस्तित्व ही खो चुके हैं। ऐसे में अब दुबारा इन देशों में संरक्षण के उपाय की बात की जा रही है. मुक्त व्यापार की निम्नलिखित सीमाएं हैं-

1. मुक्त व्यापार ख़याली मान्यताओं पर आधारित है- मुक्त व्यापार की वकालत करनेवाले एडम स्मिथ और अन्य प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री ऐसी मान्यताएं ले बैठे जो वास्तविकता से दूर हैं। जैसे स्थिर लागत की दशा का उत्पादन, साधन की गतिशीलता की मान्यता आदि शायद ही देखने को मिलता है।

2. पूर्ण प्रतियोगिता की मान्यता पर आधारित- मुक्त व्यापार से प्राप्त होने वाले लाभ वस्तु तथा साधन बाजार में पूर्ण प्रतियोगिता की मान्यता पर आधारित है, जो शायद ही उपलब्ध हो पाती है। इसके कारण साधनों का अनुकूलतम आवंटन और वस्तुओं का अनुकूलतम वितरण नहीं हो पाता जिसके कारण मुक्त व्यापार से वो स्थिति प्राप्त नहीं हो पाती जो दावा किया जाता है।

3. प्रारंभिक उद्योग के लिए अनुपयुक्त- मुक्त व्यापार प्रारंभिक उद्योग के लिए नामुनासिब है क्योंकि ऐसे उद्योग मुक़ाबला को झेल पाने में योग्य नहीं होते। फ्रेडरिक लिस्ट ने अपने प्रारंभिक उद्योग तर्क में इस बात को बहुत सरल तरीके से बताया है और ऐसे उद्योगों को प्रारंभ में संरक्षण देने की वकालत की है।

4. मांग और पूर्ति का पूरी तरह लोचदार होना आवश्यक- मुक्त व्यापार इस मान्यता पर आधारित है कि लंबे समय में मांग और पूर्ति पूरी तरह लोचदार हो जाते हैं जिसके कारण उद्योगों की लागतें रुक जाती है. किन्तु वास्तविक जगत में ऐसा संभव नहीं।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार GK Questions SET 1

अंतरराष्ट्रीय व्यापार GK Questions SET 1

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भारतीय बैंकों, मुद्रा को अंतरराष्ट्रीय व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा बनाने की जरूरत: मोदी

भारतीय बैंकों, मुद्रा को अंतरराष्ट्रीय व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा बनाने की जरूरत है. प्रधानमंत्री ने कहा कि जन समर्थ पोर्टल का उद्देश्य अलग-अलग मंत्रालयों की विभिन्न वेबसाइट के चक्कर लगाने से बेहतर एक ही पोर्टल तक पहुंच सुनश्चित करना है ताकि आम जन की समस्याओं का समाधान हो.

Updated: June 6, 2022 3:18 PM IST

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत के बैंकों और मुद्रा को अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की जरूरत है. प्रधानमंत्री ने साथ ही वित्तीय संस्थानों से आह्वान किया कि वे वित्तीय और कंपनी संचालन की बेहतर प्रथाओं को लगातार प्रोत्साहित करें.

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आजादी के अमृत महोत्सव के तहत वित्त मंत्रालय और कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के आइकॉनिक वीक समारोह का उद्घाटन करने के बाद मोदी ने कहा कि भारत ने विभिन्न वित्तीय समावेशन मंच विकसित किए हैं और इनके बारे में जागरूकता पैदा करने की जरूरत है.

उन्होंने कहा, ‘‘इन वित्तीय समावेशन समाधानों का विश्वस्तर पर विस्तार करने के प्रयास होने चाहिए.’’

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारे बैंक, हमारी मुद्रा अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला के अंतरराष्ट्रीय व्यापार का व्यापक हिस्सा कैसे बनें, इसपर भी ध्यान केंद्रित करना जरूरी है.

मोदी ने कहा कि दुनिया के एक बड़े हिस्से को भारत से समस्याओं के समाधान की उम्मीद है और यह इसलिए संभव हो पा रहा है, क्योंकि पिछले आठ वर्षों में सरकार ने सामान्य भारतीय के विवेक पर भरोसा किया और जनता को विकास में ईमानदार भागीदार के अंतरराष्ट्रीय व्यापार के फायदे रूप में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया.

उन्होंने कहा, ‘‘आज दुनिया सिर्फ एक बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में ही नहीं, बल्कि एक समर्थ, पासा पलटने वाले और नवोन्मेषी पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में आशा और अपेक्षाओं से हमारी तरफ देख रही है.’’

इस मौके पर उन्होंने ‘जन समर्थ’ पोर्टल की शुरुआत भी की, जिसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों के लिए 12 सरकारी योजनाओं को एक मंच पर लाकर उन तक पहुंच को डिजिटल माध्यमों से और आसान व सरल बनाना है.

उन्होंने सिक्कों की एक नयी श्रृंखला भी जारी, जो ‘दृष्टिहीनों के अनुकूल’ भी हैं.

ये सिक्के 1 रुपये, 2 रुपये, 5 रुपये, 10 रुपये और 20 रुपये मूल्यवर्ग के हैं और इनपर आजादी के अमृत महोत्सव (एकेएएम) का डिजाइन बना है.

उन्होंने कहा, ‘‘ये नए सिक्के देश के लोगों को निरंतर अमृतकाल के लक्ष्य याद दिलाएंगे, उन्हें राष्ट्र के विकास में योगदान के लिए प्रेरित करेंगे.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि जन समर्थ पोर्टल का उद्देश्य अलग-अलग मंत्रालयों की विभिन्न वेबसाइट के चक्कर लगाने से बेहतर एक ही पोर्टल तक पहुंच सुनश्चित करना है ताकि आम जन की समस्याओं का समाधान हो.

उन्होंने कहा, ‘‘अब भारत सरकार की सभी ऋण से जुड़ी योजनाएं अलग-अलग साइट पर नहीं, बल्कि एक ही जगह पर उपलब्ध होंगी.’’

इस अवसर पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 13 सरकारी योजनाओं को जन समर्थ पार्टल से जोड़ा जाएगा.

उन्होंने कहा, ‘‘सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए नागरिकों को एक ही सवाल बार-बार ना पूछना पड़े, इसके लिए यह पोर्टल उन्हें आसान तरीके उपलब्ध कराएगा.’’

मोदी ने कहा कि जन केंद्रित शासन और सुशासन की दिशा में निरंतर प्रयास पिछले आठ वर्षों की पहचान है. उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि इस दौरान स्थायी आवास, बिजली, गैस, पानी, मुफ्त इलाज से गरीबों को वह सम्मान मिला, जिसके वे हकदार हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में भारत ने जो सुधार किए हैं, उनमें बड़ी प्राथमिकता इस बात को भी दी गई है कि देश के युवाओं को अपना सामर्थ्य दिखाने का पूरा मौका मिले.

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे युवा अपनी मनचाही कंपनी आसानी से खोल पाएं, वे अपने उद्यम आसानी से स्थापित कर पाएं, उन्हें आसानी से चला पाएं, इसके लिए 30 हजार से ज्यादा स्वीकृति संबंधी खामियों को कम करके, डेढ़ हजार से ज्यादा कानूनों को समाप्त करके, कंपनी कानून के अनेक प्रावधानों को अवैध मानना बंद करके यह सुनिश्चित किया गया है कि भारत की कंपनियां न सिर्फ आगे बढ़ें, बल्कि नई ऊंचाई प्राप्त करें.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधार के साथ ही सरकार ने जिस बात पर ध्यान केंद्रित किया है, वह है सरलीकरण.

उन्होंने कहा कि इसी का नतीजा है कि केंद्र और राज्य के कई तरह करों के जाल की जगह अब माल एवं सेवा कर (जीएसटी) ने ले ली है.

मोदी ने कहा, ‘‘इस सरलीकरण का नतीजा भी देश देख रहा है. अब हर महीने जीएसटी संग्रह एक लाख करोड़ रुपये के पार जाना सामान्य बात हो गई है.’’

पिछली सरकारों को कटघरे में खड़ा करने की कोशिशों के तहत प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले मौजूद सरकार-केंद्रित शासन का देश ने बहुत बड़ा खामियाजा उठाया है.

उन्होंने दावा किया, ‘‘आज 21वीं सदी का भारत जन-केंद्रित रुख अपनाकर आगे बढ़ रहा है.’’

मोदी ने कहा कि भारत ने पिछले आठ वर्षों में अलग-अलग आयामों पर काम किया है और इस दौरान जो जन-भागीदारी बढ़ी, उससे देश के विकास को गति मिली है तथा गरीब से गरीब नागरिक सशक्त बना है.

उन्होंने कहा, ‘‘स्वच्छ भारत अभियान ने गरीब को सम्मान से जीने का अवसर दिया. पक्के घर, बिजली, गैस, पानी, मुफ्त इलाज जैसी सुविधाओं ने गरीब की गरिमा बढ़ाई, सुविधा बढ़ाई. कोरोनाकाल में मुफ्त राशन की योजना ने 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को भूख के खतरे से मुक्ति दिलाई.’’

उन्होंने कहा कि आज देश में लगभग 70 हजार स्टार्टअप हैं और हर दिन इसमें दर्जनों नए सदस्य जुड़ रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘आज देश जो हासिल कर रहा है, उसमें बहुत बड़ी भूमिका स्व-प्रेरणा की है… सबके प्रयास की है. देशवासी आत्मनिर्भर भारत अभियान से, ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियानों से भावनात्मक रूप से जुड़ गए हैं.’’

बता दें, वित्त और कंपनी मामलों का मंत्रालय छह से 11 जून तक ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत ‘अनुप्रतीकात्मक सप्ताह’ आयोजित कर रहा है.

आजादी का अमृत महोत्सव के ‘अनुप्रतीकात्मक सप्ताह’ के दौरान कंपनी मामलों के मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के तहत आने वाली सभी विभाग अपने समृद्ध इतिहास और विरासत के साथ-साथ आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तत्परता का प्रदर्शन करेंगे.

प्रधानमंत्री ने जिस जन समर्थ पोर्टल की शुरुआत की है, उसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों के लिए सभी योजनाओं को एक मंच पर लाकर सभी योजनाओं की पहुंच को डिजिटल माध्यमों से और आसान व सरल बनाना है.

मोदी ने इस अवसर पर एक डिजिटल प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया. इस प्रदर्शनी के माध्यम से कंपनी मामलों के मंत्रालय और वित्त मंत्रालय की पिछले आठ साल की यात्रा को दिखाया गया है.

जन समर्थ पोर्टल का उल्लेख करते हुए बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक ए के दास ने कहा कि इससे लाभार्थियों को तेजी से ऋण जारी करने में मदद मिलेगी ओर समय भी बचेगा.

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे यह पहल आगे बढ़ेगी, इसमें अधिक योजनाओं को शामिल किया जा सकेगा.

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आर्थिक संवृद्धि और विकास में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का महत्व

प्रश्न: आर्थिक विकास की द्रुत गति को हासिल करने में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की भूमिका को बखूबी मान्यता प्राप्त है। भारत जैसे विकासशील राष्ट्र के लिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के क्या लाभ हैं? विश्व व्यापार में अपनी भागीदारी बढ़ाने में भारत द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालिए।

दृष्टिकोण

  • आर्थिक संवृद्धि और विकास में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
  • भारत पर ध्यान केंद्रित करते हुए विकासशील देशों के लिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लाभों का आकलन कीजिए।
  • वैश्विक व्यापार में अपनी भागीदारी को बेहतर करने में भारत के समक्ष आने वाली चुनौतियों का परीक्षण कीजिए।
  • उत्तर के अंत में इस सम्बन्ध में सुझाव दीजिए।

उत्तर

2030 एजेंडा फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट के तहत अंतरराष्ट्रीय व्यापार को समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ाने एवं निर्धनता में कमी हेतु एक प्रमुख कारक के रूप में मान्यता प्रदान की गई है। भारत की विदेश व्यापार नीति में 2019-20 तक देश की वस्तुओं एवं सेवाओं के निर्यात को 900 बिलियन डॉलर करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। भारत का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार इसकी कुल GDP का लगभग 20% है

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लाभ

  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विकासशील देशों को उनकी आगतों की लागत में कमी करने तथा निवेश के माध्यम से वित्त प्राप्त करने में सहायता प्रदान करके उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाता है।
  • यह विकासशील देशों को नए बाजारों और नई सामग्रियों तक पहुँच की अनुमति प्रदान कर निर्यात विविधीकरण को सुगम बनाता है जो नई उत्पादन संभावनाओं हेतु मार्ग प्रशस्त करता है।
  • यह अनुसंधान एवं विकास में निवेश (FDI के माध्यम से भी), प्रौद्योगिकी और व्यावहारिक ज्ञान के विनिमय में सहायता प्रदान कर नवाचार को प्रोत्साहित करता है।
  • व्यापार में खुलापन; नए बाजारों की स्थापना, अनावश्यक बाधाओं की समाप्ति और निर्यात के सरलीकरण द्वारा स्थानीय कंपनियों के लिए व्यापारिक अवसरों का विस्तार करता है।
  • व्यापार आर्थिक क्षेत्रकों को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसरों का सृजन करता है। इससे नौकरियों में स्थायित्व तथा अधिकतम आय प्राप्त होती है जिसके परिमाणस्वरूप जीवन स्तर में वृद्धि होती है।
  • व्यापार शांतिपूर्ण एवं परस्पर लाभकारी विनिमय के माध्यम से लोगों को एक साथ लाकर राष्ट्रों के मध्य परस्पर संबंधों को सुदृढ़ता प्रदान करते हुए शांति व स्थिरता में योगदान देता है।

विकास अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का एक अत्यधिक महत्वपूर्ण पहलू है। केवल आंतरिक उपभोग द्वारा संचालित विकास सीमित होता है जो शीघ्र ही अपनी अधिकतम सीमा तक पहुँच कर संतृप्त हो जाता है। किसी भी देश के लिए विकास के क्रम में अपनी सीमाओं के बाहर के आर्थिक अभिकर्ताओं के साथ व्यापार करना आवश्यक है। इससे दोनों व्यापारिक साझेदार लाभान्वित होते हैं (यद्यपि अल्पावधि के लिए असमान रूप से)। इसलिए कम प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था अधिक लाभ प्रदान अंतरराष्ट्रीय व्यापार के फायदे करती है।

चुनौतियाँ

  • विदेश व्यापार नीति 2015-20 के अंतर्गत यह स्वीकार किया गया है कि भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता के समक्ष सबसे बड़ी बाधाएँ घरेलू स्तर पर विद्यमान हैं, जिनमें शामिल हैं:
  • अवसंरचना संबंधी बाधाएँ,
  • लेन-देन की उच्च लागत,
  • जटिल प्रक्रियाएँ जैसे – अनेक व्यापार बाधाएँ, कोटा आदि।
  • व्यापार सूचना प्रणाली की अपर्याप्तता एवं संस्थागत जड़ता।
  • विकासशील देश सामान्यतः प्राथमिक उत्पादों जैसे कृषिगत वस्तुओं (जिनके मूल्य एवं मांग में लोचशीलता नहीं रहती है) का निर्यात करते हैं।
  • पश्चिम में संरक्षणवाद के उद्भव के परिणामस्वरूप टैरिफ तथा नॉन-टैरिफ अवरोधों में वृद्धि हुई है।
  • विकसित देशों द्वारा प्रदान की जाने वाली निर्यात सब्सिडी, प्राप्तकर्ताओं को अनुचित रूप से प्रतिस्पर्धी लाभ प्रदान करती है।
  • क्षेत्रीय, बहुपक्षीय और द्विपक्षीय समूहों में देशों के मध्य सहयोग की कमी से विकासशील देशों की अंतर्राष्ट्रीय व्यापार भागीदारी प्रभावित होती है।
  • WTO जैसे मंचों पर विकसित देशों द्वारा की जाने वाली लॉबिंग ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार (विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा विनियमों से सम्बंधित) को बाधित किया है, जिसके कारण विकासशील देशों के साथ चल रही वार्ता प्रभावित हुई है।

अनुशंसाएँ :

  • टैरिफ संरचना को तर्कसंगत बनाने के साथ तकनीकी, स्वच्छता और फाइटोसेनेटरी मानकों के अनुपालन में वृद्धि करने वाली एक प्रगतिशील व्यापार नीति की आवश्यकता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नीति को अपने व्यापार प्रोत्साहन लाभों को पुनर्संरचित करना चाहिए और इन्हें वित्तीय छूट प्रदान करने के स्थान पर निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक होना चाहिए।
  • विशिष्ट क्षेत्र आधारित फोकस, जैसे- ‘राष्ट्रीय कृषि निर्यात नीति’ लाने का प्रयास जिसका प्रस्तावित लक्ष्य वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के साथ कृषि निर्यात की वर्तमान भागीदारी को 30 अरब अमेरिकी डॉलर से 60 अरब अमेरिकी डॉलर करना है।
  • WTO के ट्रेड फैसिलिटेशन एग्रीमेंट (TFA) का त्वरित कार्यान्वयन किया जाना चाहिए।

इसके अतिरिक्त, एकीकृत विश्व (ग्लोबलाइज़्ड वर्ल्ड) द्वारा प्रदत्त अवसरों का पूर्ण लाभ उठाने के लिए भारत को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के खंडित संस्करण के विपरीत बहुपक्षीय संस्करण का सक्रिय रूप से समर्थन करना चाहिए। यह दीर्घावधिक समावेशी आर्थिक विकास में योगदान करने में सहायक होगा।

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में बाधाएं वे क्या हैं?

इस लेख में, आप के बारे में जानेंगे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में बाधाएंएल, वे बाजार को कैसे प्रभावित करते हैं और राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य से उनके क्या फायदे हो सकते हैं। इसलिए मैं आपको हमारे साथ जुड़ने के लिए आमंत्रित करता हूं क्योंकि यह कई व्यापारियों के लिए एक बहुत ही रोचक और बहुत उपयोगी विषय होगा। आपको आश्चर्य होगा!

बाधाओं से अंतरराष्ट्रीय व्यापार-2

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में बाधाएं

जब हम अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बारे में बात करते हैं, तो हम निश्चित रूप से कल्पना कर सकते हैं कि कंपनियां अपने उत्पादों को विभिन्न देशों में ले जा रही हैं, या जब हम ऑनलाइन खरीदारी करते हैं और हमारे उत्पाद को कम समय में हमारे हाथ में आने की प्रतीक्षा करते हैं क्योंकि यह दूसरे देश में है। खरीद के प्रकार के आधार पर, हमें कुछ सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा ताकि बिक्री पूरी हो और हम जो चाहें प्राप्त कर सकें।

हम इसे कहते हैं, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में बाधाएं, प्रक्रियाएं, कानूनी और कर प्रक्रियाएं जो सरकारें लागू करती हैं ताकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की सीमाएं हों, लेकिन हम इसे स्पष्ट करने जा रहे हैं, क्योंकि यह अनिवार्य रूप से एक प्रतिबंधात्मक विनियमन नहीं है, क्योंकि यह कुछ नियंत्रणों को पूरा करने के लिए बहुत अच्छी तरह से काम करता है जो व्यापार अंतरराष्ट्रीय व्यापार के फायदे को लाभ पहुंचाते हैं राष्ट्रीय प्रत्येक देश की।

अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में क्या बाधाएँ हैं?

यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि सरकारों द्वारा लगाया गया प्रत्येक नियंत्रण उन वाणिज्यिक गठजोड़ों के आधार पर भिन्न हो सकता है जिन पर कुछ कंपनियों, संगठनों या सरकारों के साथ सीधे विदेश मंत्रालयों के माध्यम से हस्ताक्षर किए गए हैं। हालांकि यह एक थकाऊ प्रक्रिया है, जो कुछ के लिए कई महीनों तक चल सकती है, और यहां तक ​​​​कि कुछ वर्षों तक (व्यापारी और निर्यात या आयात योजना के आकार के आधार पर)।

नीचे के प्रकार हैं: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में बाधाएं आप क्या पा सकते हैं:

सीमा शुल्क बाधाएं

सबसे पहले, हम सीमा शुल्क टैरिफ से शुरू करते हैं, जो कर हैं जो देश में प्रवेश करने वाले माल पर लगाए जाते हैं, कई हैं और यह उत्पादों की कीमत और मात्रा पर निर्भर करता है (विज्ञापन वैलोरम, विशिष्ट और यौगिक), की कीमत वे अन्य देशों के साथ हस्ताक्षरित वाणिज्यिक गठबंधनों के आधार पर बदल सकते हैं।

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इन भुगतानों को निर्यात और आयात योजना में शामिल किया जाना चाहिए जो प्रत्येक कंपनी संचालन योजना के हिस्से के रूप में अग्रिम रूप से करती है ताकि सब कुछ सही ढंग से काम करे, और उत्पाद बिना किसी समस्या के अपने गंतव्य तक पहुंच जाए। इसके अलावा, ऊपर उल्लिखित सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को शामिल किया जाना चाहिए, और यहां तक ​​​​कि संभावनाओं का एक फंड भी, ताकि जोखिम प्रबंधन के भीतर, कंपनी किसी भी बाधा के लिए ठीक से तैयार हो।

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कोई कर्तव्य बाधा नहीं

इस फ़ील्ड में सभी सीमा शुल्क और गैर-सीमा शुल्क प्रक्रियाएं और प्रक्रियाएं शामिल हैं जिनका व्यापारी को पालन करना चाहिए ताकि माल देश में सभी स्थापित नियमों के साथ सही ढंग से प्रवेश कर सके। यह भी शामिल है:

  • प्रशासनिक बाधाएं: इसमें सैनिटरी उपाय, परमिट, वे एजेंसियां ​​शामिल हैं जो परिचालन प्रक्रिया की प्रभारी होंगी, समाप्ति तिथि, माल के शिपमेंट का समन्वय (शिपिंग लाइसेंस, फाइटोसैनिटरी परमिट, लेबलिंग नियंत्रण, आदि)।
  • तकनीकी बाधाएं: ये विशेष रूप से शिपिंग समन्वय प्रक्रियाएं हैं, वे उन उत्पादों की मात्रा को नियंत्रित करने के प्रभारी हैं जिन्हें भेजा या दर्ज किया जाना चाहिए, और कीमत और मात्रा के आधार पर, निर्धारित टैरिफ स्थापित किया जाता है, पर्याप्त परिवहन, उत्पाद में लगने वाला समय ग्राहक तक पहुँचने में, आदि।
  • कर बांड: यह के प्रकारों में से एक है अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बाधाएं गैर-आवश्यक प्रकार का, क्योंकि यह एक अनिवार्य उपयोग नहीं है, लेकिन इसकी अत्यधिक अनुशंसा की जाती है, विशेष रूप से छोटे और मध्यम आकार के उद्योगों के लिए जो इन शिपमेंट को अपना रहे हैं, क्योंकि इससे उन्हें पूरे सीमा शुल्क के संचालन और लागत में मदद मिलेगी। प्रक्रिया, अपने उत्पादों की सुरक्षा के अलावा।

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अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बाधाएं किसके लिए हैं?

मुख्य रूप से, उन्हें लागू किया जाता है ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के फायदे प्रत्येक देश का राष्ट्रीय व्यापार बाजार में एक अच्छी स्थिति बनाए रख सके, ताकि राष्ट्रीय श्रम द्वारा बनाए गए उत्पादों की विदेशी उत्पाद की तुलना में बेहतर कीमत हो, जिससे देश अपना राष्ट्रीय उत्पादन बढ़ा सके और न बाहर पर इतना निर्भर है कि, समय के साथ, वे अन्य अंतरराष्ट्रीय व्यापारियों के साथ अच्छे वाणिज्यिक संबंध बनाने और देश के भीतर उत्पादित उत्पादों को भेजने में सक्षम होंगे।

की जाने वाली महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं

अब, देश में विदेशी माल के प्रवेश के लिए, बड़ी संख्या में प्रक्रियाओं को पूरा किया जाना चाहिए जिसे टाला नहीं जा सकता है, ताकि उत्पाद अपने गंतव्य तक पहुंच सके, यानी टैरिफ, परिवहन और सैनिटरी नियमों के अनुपालन का भुगतान किया जाना चाहिए। और शिपिंग, उत्पाद का गंतव्य निर्दिष्ट करें और किसे लाभ होगा, कीमतें जो रखी जाने वाली हैं और इसे कहां बेचा जाएगा, इसका वितरण, आदि।

टैरिफ की कीमत

टैरिफ की कीमत सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है, या तो पिछले बाजार अध्ययन या कुछ देशों के साथ समझौतों द्वारा, और यह राष्ट्र के लिए आय का एक बड़ा स्रोत उत्पन्न करता है, इसलिए, जैसा कि पहले कहा गया है, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बाधाओं से वे कुछ लाभान्वित हो सकते हैं, जबकि अन्य यदि वे अपने उत्पादों को उस देश में ले जाना चाहते हैं, तो उन्हें अपने सीमा शुल्क नियमों और विनियमों का पालन करना होगा।

यदि आप इस दिलचस्प रीति-रिवाज विषय के बारे में और अधिक जानना चाहते हैं, तो मैं आपको इस अद्भुत लेख को पढ़ने के लिए आमंत्रित करता हूं, जिसमें आप इन महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के बारे में किसी भी संदेह को दूर करने में सक्षम होंगे: सीमा शुल्क व्यवस्था.

इसके अलावा, ताकि आप रीति-रिवाजों, विशिष्ट प्रक्रियाओं और के बारे में अपने ज्ञान का विस्तार कर सकें बाधाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तो आपको यह वीडियो देखना चाहिए, जो इसके बारे में हर विवरण बताता है।

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