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DSO क्या है

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मंत्री रेखा आर्य ने खाद्य आपूर्ति DSO क्या है विभाग के DSO का ट्रांसफर किया निरस्त, लेकिन फिर जारी कर दिया गया आदेश

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कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने उत्तराखंड सचिवालय से जारी खाद्य आपूर्ति विभाग में डीएसओ (District Supply Officer) के ट्रांसफर के आदेश को एक पत्र जारी करते हुए निरस्त कर दिया था. दरअसल, DSO क्या है बुधवार (22 जून) सुबह उत्तराखंड सचिवालय से एक ट्रांसफर ऑर्डर जारी हुआ था, जिसमें मंत्री रेखा आर्य के खाद्य आपूर्ति विभाग में डीएसओ के तबादले किए गए थे.

देहरादून: उत्तराखंड सचिवालय से जारी खाद्य आपूर्ति विभाग में डीएसओ (District Supply Officer) के ट्रांसफर के आदेश को कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने एक पत्र जारी करते हुए निरस्त कर दिया था, लेकिन मंत्री के पत्र का भी शायद कोई असर नहीं हुआ और शाम होते-होते देहरादून डीएसओ के ट्रांसफर का पत्र एक बार फिर जारी हो गया.

दरअसल, बुधवार (22 जून) सुबह उत्तराखंड सचिवालय से एक ट्रांसफर ऑर्डर जारी हुआ था, जिसमें मंत्री रेखा आर्य के खाद्य आपूर्ति विभाग में डीएसओ के तबादले किए गए थे. इसके अलावा तमाम जनपदों से डीएसओ को इधर से उधर किया गया था. इस ट्रांसफर लिस्ट में सचिव सचिन कुर्वे के हस्ताक्षर हैं.

लिस्ट जारी हुए अभी कुछ ही घंटे बीते थे कि मंत्री रेखा आर्य ने सभी तबादले निरस्त कर दिए थे. मंत्री के बकायदा इसको लेकर एक पत्र भी जारी किया था जिसमें साफ तौर पर कहा गया था कि जो भी स्थानांतरण के आदेश जारी हुए हैं, उनके बारे में उनसे पूछा नहीं गया है.

हालांकि, मंत्री के पत्र के बाद भी देहरादून डीएसओ के ट्रांसफर का पत्र दोबारा जारी होने के बाद फिर DSO क्या है से ये चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि क्या शासन में बैठे अधिकारी संबंधित मंत्रियों की नहीं सुन रहे हैं या अधिकारी मंत्रियों को हल्के में ले रहे हैं.

गौर हो कि, इससे पहले भी उत्तराखंड सरकार में खाद्य आपूर्ति एवं बाल विकास मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण पद संभाल रहीं रेखा आर्य का उनके विभाग के सचिव रहे आईएएस अधिकारी वी षणमुगम से विवाद हुआ था. इसके अलावा एक अन्य मामले में भी महिला सशक्तिकरण व बाल विकास विभाग की सचिव पद से सौजन्या को हटाया गया था.

पढ़िए, आखिर क्यों अल्मोड़ा के DSO पर लगा 10 हजार रुपए का जुर्माना

अल्मोड़ा के जिलापूर्ति अधिकारी पर सूचना आयोग ने 10 हजार का जुर्माना लगाया है. जरा सोचिए राशन न मिलने की शिकायत पर जो अधिकारी आपको डांटता हो और राशन कार्ड न बनने की शिकायत पर भौंहे तरेरता हो, उस पर दूसरे किसी विभाग का हंटर चले तो आपको कैसा लगेगा. देहरादून में ऐसा ही कुछ हुआ है.

अल्मोड़ा के जिलापूर्ति अधिकारी पर सूचना आयोग ने 10 हजार का जुर्माना लगाया है. जरा सोचिए राशन न मिलने की शिकायत पर जो अधिकारी आपको डांटता हो और राशन कार्ड न बनने की शिकायत पर भौंहे तरेरता हो, उस पर दूसरे किसी विभाग का हंटर चले तो आपको कैसा लगेगा. देहरादून में ऐसा ही कुछ हुआ है.

अल्मोड़ा के जिलापूर्ति अधिकारी पर सूचना आयोग ने 10 हजार का जुर्माना लगाया है. जरा सोचिए राशन न मिलने की शिकायत पर जो अध . अधिक पढ़ें

  • ETV UP/Uttarakhand
  • Last Updated : August 17, 2015, 22:51 IST

अल्मोड़ा के जिलापूर्ति अधिकारी पर सूचना आयोग ने 10 हजार का जुर्माना लगाया है. जरा सोचिए राशन न मिलने की शिकायत पर जो अधिकारी आपको डांटता हो और राशन कार्ड न बनने की DSO क्या है शिकायत पर भौंहे तरेरता हो, उस पर दूसरे किसी विभाग का हंटर चले तो आपको कैसा लगेगा. देहरादून में ऐसा ही कुछ हुआ है.

अल्मोड़ा के जिला पूर्ति अधिकारी का सीधा सच से सामना हो गया है. कलतक जो अफसर जनता पर रौब झाड़ता था, आज राज्य सूचना आयोग ने उसे सबक सिखाया है. आरटीआई एक्ट की अनदेखी करने पर आय़ोग ने इन साहब पर दस हजार रुपए जुर्माना लगाया है.

दरअसल देहरादून के अधोईवाला में रहने वाले कुंदन सिंह रावत ने पांच बिन्दुओं पर लोक सूचना अधिकारी कार्यालय जिला पूर्ति अधिकारी अल्मोड़ा से सूचना मांगी थी. समय रहते सूचना नहीं दी गई. आवेदन करने वाले शख्स ने जिलाधिकारी के समक्ष प्रथम अपील की, लेकिन यहां भी डीएसओ साहब नहीं पहुंचे.

थक हारकर आवेदनकर्ता ने राज्य सूचना आयोग में सेकेंड अपील की. 24 जून 2015 DSO क्या है को आयोग में की गई अपील के बाद आरोपी अधिकारी को नोटिस जारी किया गया और जवाब मांगा गया. आयोग को जिला पूर्ति अधिकारी टीएन उपाध्याय संतोषजन जवाब नहीं दे सके.

आयोग में सुनवाई के दौरान लापरवाही के आरोप सही पाए गए, जिसके बाद राज्य सूचना आयुक्त अनिल कुमार शर्मा ने डीएसओ अल्मोड़ा पर 10 हजार रुपए जुर्माना लगाने का आदेश दिया. साथ ही भविष्य के लिए कड़ी चेतावनी भी जारी की. डीएम अल्मोड़ा को जुर्माना वसूलने का आदेश दिया गया है.

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